News India Live, Digital Desk: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (पीके) ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने बिहार से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। जो पीके कल तक बीजेपी और पीएम मोदी के सबसे मुखर आलोचकों में से एक थे, आज वही कांग्रेस को नसीहत देते नजर आ रहे हैं। अपने एक ताजा बयान में उन्होंने साफ कहा है कि कांग्रेस पार्टी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अपनी पुरानी टिप्पणियों के लिए माफी मांगनी चाहिए।"मोदी सिर्फ नेता नहीं, देश के प्रधानमंत्री हैं"अपनी 'जन सुराज यात्रा' के दौरान मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, "नरेंद्र मोदी सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के नेता नहीं हैं, वह भारत के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं। आप उनकी नीतियों की आलोचना कर सकते हैं, आप उनसे असहमत हो सकते हैं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री के पद की एक गरिमा होती है।"उन्होंने कांग्रेस के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष को, खासकर कांग्रेस को, प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत हमले करने से बचना चाहिए। पीके का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से न केवल पद की गरिमा को ठेस पहुँचती है, बल्कि जनता में भी गलत संदेश जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को अपनी पिछली गलतियों के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।क्या हैं पीके के इस बयान के सियासी मायने?प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरा विपक्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में विपक्ष के पूर्व रणनीतिकार का इस तरह बीजेपी और पीएम मोदी का बचाव करना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है:क्या पीके का झुकाव बीजेपी की तरफ हो रहा है? हालांकि पीके हमेशा खुद को एक स्वतंत्र राजनीतिक força के रूप में पेश करते हैं, लेकिन इस बयान को उनके बीजेपी के प्रति नरम होते रुख के तौर पर देखा जा रहा है।क्या यह विपक्ष की रणनीति पर सवाल है? पीके सीधे तौर पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस की उस रणनीति पर हमला कर रहे हैं, जो सीधे पीएम मोदी को निशाना बनाती है। उनका मानना है कि यह रणनीति उल्टी पड़ती है।भविष्य के लिए नए समीकरण? यह बयान भविष्य में बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरणों का संकेत भी हो सकता है। क्या आने वाले समय में पीके की 'जन सुराज' बीजेपी के साथ खड़ी नजर आ सकती है?फिलहाल, प्रशांत किशोर के इस बयान ने कांग्रेस को असहज कर दिया है और बीजेपी को बैठे-बिठाए एक नया हथियार थमा दिया है। अब देखना यह है कि पीके की यह 'नसीहत' सिर्फ एक बयान बनकर रह जाती है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी है।
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